Thursday, 31 August 2017

सभ्य और कुलीन पुरुषों ने उसे ऊँचे दर्जे की वेश्या कहा, इंटेलिजेंट औरतों ने बिम्बों, मोटे दिमाग की आवारा!


वो लम्बी, इकहरे बदन की बेहद खूबसूरत शोख लड़कीअमीर परिवार में पैदा हुई थी. उसने दरवाज़े की आड़ में पिता का हाथ माँ के गाल पर पड़ता सुना और देखा था. जब वह छोटी बच्ची थी उसके माता-पिता का डायवोर्स हो गया. उसके भीतर प्यार का कोना खाली रह गया. जब वह बड़ी हुई बाहर से बहुत आकर्षक और फैशनेबल लेकिन भीतर से साधारण थी. वो यूनिवर्सिटी नहीं गई. प्यार देने और प्यार पाने के लिए उसने छोटे बच्चों की नैनी बनना पसंद किया, एक दिन उसके लिए राजकुमार का रिश्ता आया, उस दिन से वो प्यार के सपने देखने लगी. राजकुमार का परिवार बड़ा था जहाँ राजकुमार की माँ रानी थी और विश्व में रानी की बहुत ख्याति और सुन्दर छवि थी उसने सुन रखा था राजकुमार का परिवार दयालु है वे बेघर लोगों, विकलांग और बूढ़े लोंगों की संस्थाओं से जुड़े हैं वे अपने देश के लिए ही नहीं विश्व के नागरिकों की भलाई के लिए समर्पित हैं. जिस दिन उसकी शादी हुई दुनिया के अखबारों में उसकी फोटो आई, उसे दुनिया की सबसे खूबसूरत दुल्हन का खिताब मिला. अपने पति से उसने बहुत प्यार किया और वह दो बेटों की माँ बनी.  

 राजकुमारी का पति अक्सर अपने कर्तव्यों पूरा करने के लिए दूर रहता और जब लौटता तो भी उसके पास न होकर किसी और के पास होता उसे पति के तन से किसी और की खुशबू आने लगी उसने पता लगाया तो असलियत मालूम हुई. राजकुमारी शिकायत लिए रानी के पास गई रानी ने कहा उसे राजकुमार से कोई उम्मीद नहीं, मुझे नहीं मालूम मैं क्या सहयता करूँ. वो राजकुमार के पास गई उसने कहा राजघराने में दूसरी औरत से सम्बन्ध न रखने वाला मैं पहला राजकुमार नहीं बनना चाहता. वह उस औरत के पास गई जो उसके पति की प्रेमिका थी. उसने कहा तुम्हारे ऊपर दुनिया के आदमी फ़िदा हैं तुम्हारे दो खूबसूरत बच्चे हैं और क्या चाहिए तुम्हें? राजकुमारी ने कहा मुझे मेरा पति चाहिए। धीरे-धीरे उसे विश्वास हो गया राजमहल बहुत सुन्दर है पर उसमें रहने वाले लोग गूंगे-बहरे और अंधे हैं उसने खानापीना छोड़ दिया, वो बहुत उदास रहने लगी, उसने खुदकुशी की नाकामयाब कोशिशें की. राजमहल के डाक्टर उसे ख़ुशी की गोलियां देना चाहते थे, उन्हें रात में नींद नहीं आती थी कहीं राजकुमारी किसी पर चाक़ू न चला दे. राजमहल की बेरुख़ी और पति की उपेक्षा ने उसके भीतर प्यार का कोना पहले से भी ज्यादा गहरा कर दिया.    

अपने दुखों को अपने संरक्षक के अलावा किसी से बाँट नहीं पाती. संरक्षक को राजकुमारी से सहानुभूति थी. उसने राजकुमारी को रोने के लिए कन्धा दिया. एक हादसे में संरक्षक अपनी जान खो बैठा. राजकुमारी के दिल ने संरक्षक की मौत को हादसा मानने से इनकार कर दिया. इस बीच राजकुमार से उसका तलाक हुआ और राजमहल ने राजकुमारी को उसके खिताब से वंचित कर दिया. राजकुमारी बीमार रहने लगी. वह जो भी खाती उसे नहीं पचता और सबसे बड़ी बीमारी थी उसका अकेलापन, राजमहल और पति का रिजेक्शन. राजकुमारी के प्यार का कोना खतरनाक लेवल तक नीचे हो चला था.

प्यार का कोना भरने के लिए वह अस्पताल में एड्स पीड़ितों से हाथ मिलाती, उनके दुःख-दर्द सुनती. गरीब देशों में जाकर भूखे-नंगे बच्चों को अपनी गोद में बैठा कर प्यार देती. बेघर लोगों के अड्डों पर जाती। केंसर चेरिटी के डिनर पर मुख्य अतिथि के रूप में उनके दर्द बांटती. उसका आत्मविश्वास और ख्याति दोनों आसमान छूने लगे. मीडिया उसका दीवाना गया. वो जहाँ जाती, वे उसका पीछा करते. उसकी दयाउदारता, संवेदनशीलता और मानवता ने राजमहल की परम्पराओं को चुनौती दे डाली. उसने विश्व के कोने-कोने में लोगों के दिल में जगह बना ली. राजकुमारी के व्यक्तित्व और विशिष्टता के समक्ष राजमहल का जादू फीका पड़ने लगा. राजकुमारी के प्रति जनता का सम्मोहन देख राजकुमार और राजमहल के लोग हतबुद्ध और चिड़चिड़ा गए. वो उसकी तरह मशहूर क्यों नहीं हो सकते? अपनी कमियों का कारण वो राजकुमारी को मानने लगे.   
              
प्यार का खाली कोना भरने के लिए जिस पुरुष ने भी उसकी परवाह की वह उसकी हो गई. मीडिया, दुनिया, राजमहल और सत्ता के डर-दबाव के कारण पुरुष पीछे हट जाते और उनके रिश्ते को कोई अंजाम नहीं मिलता. ऐसे ही एक दिन एक नए रिश्ते की शुरुआत ने, प्यार का कोना भरने की चाह ने और मीडिया के दीवानेपन ने उसकी जान ले ली. राजकुमारी की उम्र छतीस वर्ष की थी और उसके दो बेटे पन्द्रह और बारह वर्ष के थे. माँ की मौत से पहले उनके पिता ने हमेशा उनसे यही कहा उनकी मां जैसी खुदगर्ज़ औरत दुनिया में नहीं मिलेगी. सभ्य और कुलीन पुरुषों ने उसे ऊँचे दर्जे की वेश्या का दर्जा दिया. इंटेलिजेंट औरतों ने उसे बिम्बों, मोटे दिमाग की आवारा, अटेंशन सीकर औरत कहा और दुनिया के समझदार लोगों ने उसे फैशन और ख्याति की भूखी राजकुमारी करार दिया. आम आदमी के दिल में वो उनके सपनो की राजकुमारी बनी रही.
    
राजकुमारी की मौत के बीस वर्ष बाद उसके बेटों ने अपनी जुबान के ताले तोड़े. उन्होंने टेलिविज़न और अखबार वालों को अपनी माँ के बारे में बताया. उन्होंने कहा वो हमें अक्सर स्कूल लेने आती थी, उसकी बाहें उन्हें बाहों में भींचने को उतावली रहती. माँ जैसा गर्मजोश आलिंगन उन्हें किसी से नहीं मिला. वो मीडिया और पब्लिक के सामने उन्हें आलिंगन देने में कभी नहीं सकुचाई. बेटों के साथ शरारत में माँ ने उन सभी माडल को न्योता दे डाला जिनके पोस्टर उनकी बेडरूम की दीवारों पर लगे थे. उनकी माँ को प्यार, ख़ुशी और हंसी बिखरने की महारत हासिल थी... उनकी माँ दुनिया की सबसे खूबसूरत और जिंदादिल माँ थी. बचपन से लेकर मौत तक प्यार से वंचित राजकुमारी को राजमहल, मीडिया और दुनिया जाननेसमझने और परिभाषित करने में नाकामयाब रहे पर उसके बेटे नहीं। उनके सभी साक्षात्कारों में राजमहल और पिता का नाम अनुपस्थित था.  

2 comments:

Armaan Maurya said...

बहुत सुंदर रचना आप कितना अच्छा लिखते हो पहली टिप्पणी मेरी है इसलिए मुझे आटो ग्राफ दीजिए ।

Pushpendra Dwivedi said...

badhiya lekh apke vichaar padhkar achha laga


http://www.pushpendradwivedi.com/%E0%A5%9E%E0%A4%BF%E0%A5%9B%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9C%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%AC%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA/