Wednesday, 15 October 2008

बार्बी सुधर रही है ....


वो मसूरी के पाँच सितारा जे पी होटल मैं ठहरे हैं। अपनी ग्यारह वर्षीय बेटी को बोर्डिंग मैं छोड़ने आए हैं। जैसे सूली पर चढ़ने से पहले मुजरिम की इच्छा पुरी की जाती है आँचल की भी हर ख्वाइश पुरी की जा रही हैं अन्तर सिर्फ़ इतना है यहाँ एक नही, हज़ारो ख्वाईशें उसकी और सभी को पुरा करने की क्षमता, सामर्थ्य और धर्ये उसके माता-पिता रखते हैं ....उसे फ़िल्म देखनी है, पीजा खाना है, चाकलेट आइसक्रीम का बोक्स खतम करना है, हर्बल मसाज करानी है, पेडी क्योर करानी है, बिस्कुट और चोकलेट का स्टाक खरीदना है, ब्राइडल बार्बी खरीदनी है, नया स्कूल का बेग लेना है क्योंकि उसके जैसा बेग क्लास की लड़की के पास है, वो अपना मोबाइल हास्टल में रख सके इसलिये हाउस कीपर को देने के लिये सोने की अंगूठी ले जानी है, बर्गर की दूकान वाले को अडवांस देना है।

वो जाने के लिये तैयार है उसका सारा समान गाड़ी में रखा जा चुका है। ड्राईवर सफारी की पिछली सीट पर बैठा है उसके पिता ड्राइव कर रहे हैं माँ के चेहरे पर उदासी है उसके हाथ में चाकलेट और आखों में आईलाइनर । माता-पिता उसे समझा रहे हैं कि वह उनसे विदाई लेते समय रोएगी नही। वो चाकलेट का रेपर खोलती है, बिना देखे पीछे बठे ड्राईवर के ऊपर फ़ेंक देती है ड्राईवर लपक कर उसे उठाता है बड़ी सहजता से आँचल को टीशू पास करता है और बाकी बचे रेपर को अपनी और फेके जाने का इंतज़ार करता है। तभी संजना केमिस्ट की दूकान देख चिल्ला पड़ती है "मुझे बुखार है थर्मामीटर चाहिए"। उसके पिता गाड़ी रोक देते हैं और ड्राईवर की और नोट बढ़ाते हैं।

आँचल मम्मी के साथ किट्टी पार्टी में जाकर और दादी के साथ टीवी सीरियल देख बिगड़ रही थी, इसलिये उसे बार्डिंग स्कूल भेजा गया। यहाँ आकर उसके सुधेरने की संभावना बढ़ गई है क्योंकि अब वह ड्राईवर को ब्लेकमेल नही कर सकती कि वह उसे टूशन ना ले जा कर, उसके दोस्त के यहाँ ले चले वरना तो वह पापा-मम्मी से कह देगी ड्राईवर ने उसके साथ बतमीजी करने की कोशिश की ...

3 comments:

Anonymous said...

good one!

yashasvi said...

a good and minute observation .She must be some real girl i believe !

Kishore Choudhary said...

हरी शंकर परसाई जी के आम पात्रों और सहज भाषा की स्मृति हो आई है, आपके यहाँ बिम्ब और प्रतीक आधुनिक कथित सभ्यता से आए है और अपनी पूरी शालीनता से वाक्य दर वाक्य परतें उधेड़ते जाते है।