
आजकल वह खुश नहीं। नौकरी, घर, दफ्तर, कार, टी वी, मेल बॉक्स, मोबाइल फ़ोन, मोगरा, चाँद, बारिश, प्यार किसी से भी खुश नही और सबसे अधिक नाखुश अपने आप से। ऐसे नाखुशी के दौर उसके जीवन में आते-जाते रहे हैं लेकिन अब से पहले उसने उन्हें अपनी जिंदगी नही बनाया था। इस दौर से गुजरने के लिए उसके पास हमेशा एक हथियार रहा है जो साउंड प्रूफ़ बुलेट से भी ज्यादा साउंड लेस और असरदार है। उसका इस्तेमाल वो कभी-कभी करता था लेकिन आजकल वह उसे हमेशा अपनी जेब में लिए घूमता है दिन-रात स्वयं पर वार करने के लिए और लगे हाथों अपने शुभचिंतको को लपेटने के लिये। इससे पहले की कोई उफ़ करे वह अपने कान और आँख बंद कर लेगा और यह उम्मीद रखता है जितना उसे अपने दर्द से प्यार हो गया है उसके अपने भी उसके दिए दर्द को उतना ही प्यार करें। उसकी खुदगर्जी की सीमा पार हो चुकी है दर्द को बांटना तो दूर उसकी गंध भी किसी को लगने नही देता। अपनों से फरेब कर दुनिया के सारे गम अकेले हड़प करना चाहता है। यदि आप गलती से उसके बढ़ते बैंक-बैलेंस का जिक्र छेड़ दें तो वह बड़ी आसानी से नाकार देगा जैसे कोई अपनी अवैध संतान को नाकारता है।
प्यार पर उसको यकीन है यही उसकी पहचान और प्रेरणा है बड़ी शिद्दत से अक्सर वह इसका एलान अपने दोस्तों और ब्लॉग पर करता है यदि उसका प्यार लोक-लिहाज़ छोड़ उसके दरवाजे पर दस्तक दे तो वह दरवाजे पर ही पानी पकड़ा दरवाजा बंद कर लेगा कहीं उसके भीतर की आंच की भनक प्यार को न लग जाए। उस आंच को वह टी वी चेनल बदलने और सिंगल माल्ट के ग्लास के लिये बचा कर रख लेगा। अचानक प्यार को वह सड़क पर मिल जाए तो फटाफट अपना हथियार सड़क पर फेंक उसका हाथ थाम लेगा और पूछेगा "कैसी हो? कहाँ थी इतने दिन से?" विदा लेते ही चारों तरफ़ नज़र घुमा चुपचाप सड़क से हथियार उठा, फूँक मार, धूल झाड़, सहजता से अपनी जेब में रख, सिटी बजाता अंधेरों में गुम हो जायेगा।
फोटो - गूगल सर्च इंजन से




